पोहरी ओवरब्रिज में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, क्या हादसे के बाद जागेगा विभाग?


पोहरी ओवरब्रिज में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, क्या हादसे के बाद जागेगा विभाग?

साइड में लगाए जा रहे कंक्रीट स्ट्रक्चर की मजबूती पर उठी आपत्ति, ठेकेदार ने बताया- पक्की दीवार का दिया था सुझाव







शिवपुरी। पोहरी रोड पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज का काम अभी जारी है, लेकिन निर्माण के दौरान सामने आ रही व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस बार मामला ब्रिज के किनारे लगाए जा रहे सीमेंट-कंक्रीट के स्ट्रक्चर से जुड़ा है। इन स्ट्रक्चरों को सुरक्षा दीवार के रूप में लगाया जा रहा है, लेकिन इनके आपस में लॉक होने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ओवरब्रिज के जिस हिस्से में ये स्ट्रक्चर लगाए जा रहे हैं, वहां सड़क में मोड़ भी है। ऐसे में यदि रात के समय कोई वाहन तेज रफ्तार में आता है और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाता तो साइड स्ट्रक्चर से टक्कर की आशंका बनी रहेगी। यदि टक्कर के बाद स्ट्रक्चर अपनी जगह से खिसकते या टूटते हैं तो नीचे सर्विस रोड से गुजरने वाले वाहन और लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

स्ट्रक्चर को सिर्फ वजन के भरोसे रखने पर सवाल

मौके की निर्माण व्यवस्था को लेकर सवाल यह है कि सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे इन स्ट्रक्चरों को केवल उनके वजन और आपसी जुड़ाव के भरोसे रखा गया है या इन्हें किसी अतिरिक्त लॉकिंग अथवा कनेक्टिंग सिस्टम से भी सुरक्षित किया गया है।

अन्य कई पुलों में सुरक्षा स्ट्रक्चर एक-दूसरे में फंसने के साथ अतिरिक्त कनेक्शन से जुड़े रहते हैं। ऐसे में यहां इस्तेमाल किए जा रहे स्ट्रक्चर की तकनीकी क्षमता और स्वीकृत डिजाइन को सार्वजनिक किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

ठेकेदार की सफाई- मजबूती से जुड़े हैं

निर्माण कार्य के ठेकेदार एसएस गुप्ता ने बताया कि ये छोटे स्ट्रक्चर हैं और कम ऊंचाई वाले पुलों में लगाए जाते हैं। उनके अनुसार बड़े पुलों में अलग प्रकार के आपस में फंसने वाले स्ट्रक्चर लगाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि लगाए जा रहे स्ट्रक्चर आपस में मजबूती से जुड़े रहते हैं। ठेकेदार के मुताबिक उनकी ओर से सीमेंट-कंक्रीट की पक्की दीवार बनाने का सुझाव भी दिया गया था, लेकिन उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया।

निर्माण के दौरान पहले भी सामने आई थी घटना

ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान पहले एक हिस्सा टूटकर गिरने की घटना भी सामने आ चुकी है। इसके बाद उसकी मरम्मत की गई। इस घटना के बाद अब निर्माण में इस्तेमाल हो रही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना संबंधित अधिकारियों के लिए गंभीर विषय है।

करोड़ों की परियोजना में गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी?

पोहरी रोड का रेलवे ओवरब्रिज शहर के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। इस तरह के बड़े निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं होती। संबंधित निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों और निगरानी अधिकारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

इसलिए जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि साइड स्ट्रक्चर किस स्वीकृत डिजाइन के तहत लगाए जा रहे हैं, इनकी मजबूती का तकनीकी परीक्षण हुआ है या नहीं और तेज रफ्तार वाहन की टक्कर की स्थिति में नीचे सर्विस रोड की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किया गया है।

अभी जांच हुई तो भविष्य का खतरा टल सकता है

ओवरब्रिज पर अभी यातायात पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में निर्माणाधीन हिस्से का तकनीकी निरीक्षण कर किसी कमी को समय रहते दूर किया जा सकता है। यदि निर्माण पूरा होने के बाद कोई हादसा होता है तो उस समय सुधार करना मुश्किल होगा।

इसलिए जरूरत इस बात की है कि पुल के उद्घाटन का इंतजार करने के बजाय अभी इसकी सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाए, ताकि करोड़ों रुपये की परियोजना जनता के लिए सुविधा के साथ सुरक्षित भी साबित हो।

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